
बोल बम। सावन के आते ही बोल बम का जयकारा लगना शुरू हो जाता है। सावन का महीना हिन्दुओं के लिए सबसे पवित्र महिना माना जाता है। कहा जाता है कि इस पावन महिने में देवों के देव महादेव यानि भगवान शिव अपने भक्तों से मिलने कैलाश छोड़, अपने धाम में विराजमान होते हैं, विशेषकर हरिद्वार के बद्रीनाथ व केदारनाथ में और देवघर के बैद्यनाथधाम में। सावन में इन दोनो तीर्थ स्थानों पर विश्वप्रसिद्ध मेला लगता है। इस पावन महीने में बाबा पर जल चढ़ाने भारत के विभिन्न हिस्सों तथा विदेशों से भी भक्त लाखों-लाख की संख्या में आते हैं। अगर बात हरिद्वार की करें तो उत्तराखण्ड, पश्चिमि उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान व मध्य प्रदेश के अधिकांश भक्त शिव की अर्चना करने यहां आते हैं, जबकि बिहार, झारखण्ड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम जैसे राज्यों तथा पड़ोसी देश नेपाल के अधिकांश भक्त देवघर आते हैं।
भगवान शंकर का नाम आते ही बोल बम का जयकारा लगाने को मन करता है और जुबां पर होता है- जय जय शिव, शंकर कांटा लगे न कंकड़, कि प्याला तेरे नाम का पीया। प्याला तो भगवान के नाम का पीते हैं, मगर प्याले में आखिर होता क्या है- चाय, मदिरा या कुछ और ? जी हां! इस प्याले में होता है भोलेनाथ की बूटी यानि भांग। लोगों का मानना है कि सर्पमाला व सिंह की छाल धारण करने वाले बाबा औघरदानी (प्रभु शिव) द्वारा सेवन किए जाने वाले बूटियों में सबसे प्रमुख भांग, धतूरा एवं गांजा है।और यही वजह है कि इतने नशीले व जहरीले पदार्थों का सेवन करने वाले भोले बाबा ने संसार की रक्षा करने हेतु समुद्र मंथन से निकले विष को सहर्ष पी गए और उसे पचा भी लिया। इसलिए कहते हैं कि पूरे सावन भगवान शिव को जल व पुष्प के अलावा भांग- धतूरा चढ़ाने वालों पर भगवान खुश होकर मनचाहा वरदान देते हैं। तो अगर आपको भी पूरी करवानी हो कोई मुराद तो भैरो बाबा (नंदि) से किजिए पैरवि और कहिए— मोर भंगिया के मनाय द हे भैरो नाथ, मोर भंगिया के मनाय द..........।।
पवन कुमार चौधरी